(ग्रीवा का ध्यान)
तेरी ग्रीवा जो पुरारि की भुजा के नित्य स्पर्श से खरदरी हो रही है, तेरे मुखकमल को धारण करती हुई कमलनाल ( मृणाली) जैसी सुन्दर लगती है, जो स्वतः तो गौर वर्ण है परन्तु अधिक समय तक अगर के गाढे लेप से कीचड़ में सनी हुई सी मलीन दिखती है और जिसके नीचे हार पहना हुआ है।
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