(जिह्वा का ध्यान)
हे जननि! बिना थके पति के गुणानुवाद का बारंबार जप करने वाली, तेरी जवाकुसुम की द्युति सदृश लाल जिह्वा की जय है। जिसके अग्र भाग पर आसीन स्फटिक पत्थर की जैसी शुद्ध कांतिमयी सरस्वती की मूर्ति के शरीर का वर्ण माणिक्य सदृश परिणत हो गया है।
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