(ओष्टों का ध्यान)
हे सुन्दर दातों वाली भगवति ! स्वाभाविक लाल रंग के तेरे होठों की शोभा का सादृश्य करने वाले पदार्थों के नाम कहता हूं। मूंगे की लता में यदि फल आ जाय, (तो उतने सुन्दर कहे जा सके हैं), परन्तु बिंब फल तो नहीं, क्योंकि उनकी अरुणिमा तो तेरे विम्ब की प्रतिबिंबित् अरुणिमा की झलक सदृश है, यदि उनमे किसी प्रकार तेरे होठों की तुलना भी की जाय, तो वे तेरे होठों की सुन्दरता की एक कला के बराबर भी सुन्दर न उतरने से क्या लज्जित नहीं होते ?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सौन्दर्यलहरी के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
सौन्दर्यलहरी के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।