हे शर्वाणि ! सरस्वती की सुन्दर युक्ति को जो अमृत की लहरी के कौशल को हरती है श्रवण रूपी चुल्लुओं द्वारा अविरल पान करते समय तेरे कुंडलगण चमत्कार पूर्ण उक्तियों की श्लाधा सूचक सिर हिलाते समय, झण २ बजकर मानों ॐकार का उच्चारण सदृश हुँकार द्वारा उत्तर दे रहे हैं।
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