हे पर्वतराज के कुल की प्रमुख कली ! ये तेरे बाणों सदृश दोनों नेत्र कानों तक पहुंचे हुए हैं, जो पंखों के स्थान पर पलकें धारण किए हुए हैं और पुरारि के चित्त की शान्ति का भंग करने वाले फल से युक्त है, कान तक ताने हुए वे कामदेव के बाणों का कार्य कर रहे हैं।
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