शिव के प्रति तेरी दृष्टि श्रृंगारार्द्र है, इतर जनों के प्रति कुत्सित उपेक्षा युक्त, गंगा पर सरोष, शिवजी के चरित्रों पर विस्मय प्रकट करने वाली, शिवजी के सर्पों से भीत, कमलों की शोभा को पराजित करने वाली, सखियों के प्रति मुस्कान लिए हुए है और हे जननि मेरे ऊपर तेरी करुणायुक्त दयादृष्टि है।
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