थोड़े से ही भाग्यवान् हैं, जो चित और आनन्द की धारारूपिणी, अमृत-सागर के मध्य में मणि द्वीप में अलौकिक वृक्षों के उद्यान से वेष्टित और नीपवृक्षों के उपवन से युक्त चिन्तामणि गृह में परम शिवरूपी पलंग पर (जिसके चार शिव आधारस्वरूप हैं) बैठी हुई तुमको भजते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सौन्दर्यलहरी के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
सौन्दर्यलहरी के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।