हे हिमालयकन्थे! भ्रमरों की ताँतवाला पुष्प-धनुष और पाँच कुसुम-शर लिये बसन्त-द्वारा चालित मलयवायु के रथ पर बैठा अशरीरवान् कामदेव तुम्हारे कृपाकटाक्ष के प्रताप से ही इस संसार को विजय करता है।
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