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सौन्दर्यलहरी • अध्याय 1 • श्लोक 42
इति पूज्यपादश्रीमच्छंकराचार्यविरचित आनन्दलहरी सम्पूर्णा॥ ॥ ॐ शान्तिः । ॐ जगदम्बार्पणमस्तु ।।
इसी पद्य तक आनन्दलहरी का वर्णन है।
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