मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सौन्दर्यलहरी • अध्याय 1 • श्लोक 36
तवाधारे मूले सह समयया लास्यपरया नवात्मानं मन्ये नवरसमहाताण्डवनटम् । उभाभ्यामेताभ्यामुदयविधिमुद्दिश्य दयया सनाथाभ्यां जज्ञे जनकजननीमज्जगदिदम् ॥
मैं तुम्हारी नृत्य-निपुणा समया शक्ति (सावित्री) के सङ्ग शिवरूप ब्रह्मा की मूलाधार में वन्दना करता हूँ। यह शिव नवरस के प्रकाशक महानृत्य में कुशल हैं। इन दोनों से माता-पितामय यह संसार अपने विभव-सहित उन दोनों के संयुक्त उद्देश्य की संयुक्त सहायता से पूर्त होने के निमित्त तुम्हारी दया से सृष्ट हुआ है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सौन्दर्यलहरी के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सौन्दर्यलहरी के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें