मैं तुम्हारी नृत्य-निपुणा समया शक्ति (सावित्री) के सङ्ग शिवरूप ब्रह्मा की मूलाधार में वन्दना करता हूँ। यह शिव नवरस के प्रकाशक महानृत्य में कुशल हैं। इन दोनों से माता-पितामय यह संसार अपने विभव-सहित उन दोनों के संयुक्त उद्देश्य की संयुक्त सहायता से पूर्त होने के निमित्त तुम्हारी दया से सृष्ट हुआ है।
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