तुम सूर्य और चन्द्ररूपी स्तनद्वय से युक्त शम्भु की शरीर हो। हे भगवती! तुम निष्पाप अर्थात् निर्विकार हो; इस हेतु तुम्हारी निःशेषता वा सर्वांशता और शेषता वा असम्पूर्णता वा अंशता में परस्पर-सम्बन्ध का युक्तानन्द कैवल्यानन्दरूप से है।
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