तुम अज्ञानियों के अज्ञानरूपी अन्धकार के नाश करनेवाले ज्ञानरूपी सूर्य हो। तुम बुद्धिहीनों की चैतन्यतारूपी मधु, बहानेवाली धारा हो । तुम दरिद्रों की चिन्तामणि की माला की मणि और भवसागर में डूबे हुए मुर राक्षस के शत्रु वराह भगवान् की दंष्ट्रा (दाँत) हो।
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