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सौन्दर्यलहरी • अध्याय 1 • श्लोक 26
विरिञ्चिः पञ्चत्वं व्रजति हरिराप्नोति विरतिं विनाशं कीनाशो भजति धनदो याति निधनम् । वितन्द्री माहेन्द्री विततिरपि संमीलितदृशा महासंहारेऽस्मिन् विहरति सति त्वत्पतिरसौ ॥
हे सती! तुम्हारे पति मात्र महाप्रलय के समय में रहते हैं, जिनके साथ तुम विहार करती हो और सभी ब्रह्मा, विष्णु, यम, कुबेर आदि मर जाते हैं। निरालस्य आँखोंवाले इन्द्र भी अपनी आँखें बन्द कर लेते हैं अर्थात् मर जाते हैं।
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