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सौन्दर्यलहरी • अध्याय 1 • श्लोक 25
त्रयाणां देवानां त्रिगुणजनितानां तव शिवे भवेत् पूजा पूजा तव चरणयोर्या विरचिता । तथा हि त्वत्पादोद्वहनमणिपीठस्य निकटे स्थिता ह्येते शश्वन्मुकुलितकरोत्तंसमकुटाः ॥
हे शिवे! तुम्हारे चरण-युगल की पूजा ही सत्व, रज और तमोगुणों से सृष्ट तीनों देवों की पूजा है। (कारण) ये उच्च मुकुटवाले (देव) हाथ जोड़े तुम्हारे पाँव रखने की मणियों की बनी चौकी के समीप खड़े हैं।
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