हे भवानि! तू मुझ दास पर कृपादृष्टि दान कर। तुम्हारे चरणों का नीराजन विष्णु, ब्रह्मा और इन्द्र के तेजोमय मुकुटों से होता है और जो तुझे भवानी कहकर पुकारता है, उसको तुम तत्काल अपने में मिला लेती हो।
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