कविगण यदि शरदऋतु की चाँदनी-जैसी निर्मला, जटाजूट पर चन्द्रवाली, चारों हाथों में वर, अभय, स्फटिकमाला और पुस्तक लिए तुम्हारा अभिवादन और मनन न कर लिया करें तो उनकी रचना मधु, दुग्ध और द्राक्षा (अंगूर) के समान मधुर कैसे हो?
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