हे हिमगिरिसुते! ब्रह्मादि देव तुम्हारी सुन्दरता का पूर्ण अनुभव न कर पा किसी प्रकार कल्पना कर लेते हैं। देवस्त्रियाँ तुम्हारी अलौकिक सुन्दरता के ध्यान से अज्ञानियों को दुष्प्राप्य शिव-सामरस्यावस्था को प्राप्त करती हैं।
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