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सौन्दर्यलहरी • अध्याय 1 • श्लोक 11
चतुर्भिः श्रीकण्ठैः शिवयुवतिभिः पञ्चभिरपि प्रभिन्नाभिः शम्भोर्नवभिरपि मूलप्रकृतिभिः । त्रयश्चत्वारिंशद्वसुदलकलाश्रत्रिवलय त्रिरेखाभिः सार्धं तव शरणकोणाः परिणताः ॥
चार श्रीकण्ठों (शिव) शम्भु नौ प्रकृति रूप से पाँच युवतियों (शिव) तेरा बासस्थान से बना है। कोणों की संख्य तेंतालिस(४३) है। इसकी तीन वृत्तियाँ, तीन रेखायें और आठ सोलह तथा दल वाले क्रमश: दो कमल (चक्र) हैं।
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