मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सरस्वती रहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 9
ततः प्रवर्तते वाणी स्वेच्छया ललिताक्षरा । गद्यपद्यात्मकैः शब्दैरप्रमेयैर्विवक्षितैः ॥
तत्पश्चात् उसकी वाणी स्वतः ही प्रवाहित होने लगती है, और वह अपनी इच्छा के अनुसार मधुर एवं सुन्दर अक्षरों से युक्त गद्य और पद्यरूप ऐसे असंख्य तथा अभिप्रेत शब्दों को सहज ही व्यक्त करने में समर्थ हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सरस्वती रहस्य के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सरस्वती रहस्य के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें