जो मनुष्य निर्बाध (बिना किसी विघ्न के) उत्तम कवित्व (काव्य-रचना की क्षमता), सांसारिक सुखों का उपभोग (भुक्ति) और अंततः मोक्ष (मुक्ति) की कामना करता है, वह इस दशश्लोकी स्तुति के द्वारा प्रतिदिन भगवती सरस्वती की श्रद्धापूर्वक स्तुति करता है।
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