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सरस्वती रहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 7
यः कवित्वं निरातङ्क भुक्तिमुक्ती च वाञ्छति । सोऽभैच्यैनां दशश्लोक्या नित्यं स्तौति सरस्वम् ॥
जो व्यक्ति निर्विघ्न कवित्व-शक्ति, भोग और मोक्ष की कामना करता है, उसे चाहिए कि वह श्रद्धा और भक्ति के साथ इस दशश्लोकी स्तुति द्वारा नित्य भगवती सरस्वती की स्तुति करे।
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