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सरस्वती रहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 4
कम्बुकण्ठी सुताम्रोष्ठी सर्वाभरणभूषिता । महासरस्वती देवी जिह्वाग्रे संनिविश्यताम् ॥
शंख के समान सुडौल और मनोहर कंठ वाली, कोमल तथा ताम्रवर्ण (हल्की लालिमा से युक्त) सुंदर अधरों वाली, विविध दिव्य आभूषणों से अलंकृत परम पूज्या महासरस्वती देवी मेरी जिह्वा के अग्रभाग पर सदा विराजमान रहें।
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