कम्बुकण्ठी सुताम्रोष्ठी सर्वाभरणभूषिता । महासरस्वती देवी जिह्वाग्रे संनिविश्यताम् ॥
शंख के समान सुडौल और मनोहर कंठ वाली, कोमल तथा ताम्रवर्ण (हल्की लालिमा से युक्त) सुंदर अधरों वाली, विविध दिव्य आभूषणों से अलंकृत परम पूज्या महासरस्वती देवी मेरी जिह्वा के अग्रभाग पर सदा विराजमान रहें।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सरस्वती रहस्य के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
सरस्वती रहस्य के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।