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सरस्वती रहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 32
मयि जीवत्वमीशत्वं कल्पितं वस्तुतो नहि । इति यस्तु विजानाति स मुक्तो नात्र संशयः ॥
मुझ (परमात्मा) में जीवत्व और ईश्वरत्व का भेद वास्तव में नहीं है, यह केवल कल्पित (अध्यास) है—जो साधक इस सत्य को भली-भाँति जान लेता है, वह निःसंदेह मुक्त हो जाता है।
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