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सरस्वती रहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 31
भिद्यते हृदयग्रन्थिश्छिद्यन्ते सर्वसंशयाः । क्षीयन्ते चास्य कर्माणि तस्मिन्दृष्टे परावरे ॥
जब उस परावर ब्रह्म का साक्षात्कार हो जाता है, तब हृदय की गाँठ (अज्ञान का बन्धन) टूट जाती है, सभी संशय नष्ट हो जाते हैं और उसके समस्त कर्म (बंधनरूप संस्कार) क्षीण हो जाते हैं।
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