अक्षसूत्राङ्कुशधरा पाशपुस्तकधारिणी । मुक्ताहारसमायुक्ता वाचि तिष्ठतु मे सदा ॥
अक्षमाला और अंकुश धारण करने वाली, पाश और पुस्तक को धारण करने वाली, तथा मुक्ताहार से विभूषितभगवती सरस्वती मेरी वाणी में सदा विराजमान रहें।
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