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सरस्वती रहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 27
ध्यायदृश्यानुविद्धोऽयं समाधिः सविकल्पकः । स्वानुभूतिरसावेशादृश्यशब्दाद्यपेक्षितुः ॥
दृश्य के द्वारा अनुविद्ध (दृश्य को आधार बनाकर की जाने वाली) यह सविकल्प समाधि है। इसमें साधक स्वानुभूति के रस में आविष्ट होकर, दृश्य, शब्द आदि की अपेक्षा रखते हुए ध्यान करता है।
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