इन पाँच अंशों में से प्रथम तीन—‘अस्ति’, ‘भाति’ और ‘प्रिय’—ब्रह्मस्वरूप हैं, और शेष दो—‘नाम’ तथा ‘रूप’—जगत् के स्वरूप हैं; इन नाम और रूप से परे जो तत्त्व है, वही सच्चिदानन्द स्वरूप ब्रह्म है।
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