इन पाँच अंशों में से प्रथम तीन— अस्ति, भाति और प्रिय — ब्रह्मस्वरूप हैं; जबकि अन्तिम दो— नाम और रूप — जगत् के स्वरूप हैं।
अतः नाम और रूप का त्याग करके, मनुष्य को सच्चिदानन्दस्वरूप ब्रह्म में ही तत्त्वदृष्टि स्थापित करनी चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सरस्वती रहस्य के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
सरस्वती रहस्य के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।