या शक्तिस्त्वद्वशाद्वह्म विकृतत्वेन भासते । अत्राप्यावृतिनाशेन विभाति ब्रह्मसर्गयोः ॥
जो शक्ति आपके अधीन रहकर ब्रह्म को विकारयुक्त(परिवर्तनशील) के रूप में प्रकट करती है, उसी के कारण यह भेदाभास उत्पन्न होता है।
यहाँ भी, आवरणशक्ति के नष्ट हो जाने पर, ब्रह्म और सृष्टि का वास्तविक स्वरूप प्रकाशित हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सरस्वती रहस्य के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
सरस्वती रहस्य के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।