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सरस्वती रहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 20
चितिच्छायासमावेशाज्जीवः स्याद्व्यावहारिकः । अस्य जीवत्वमारोपात्साक्षिण्यप्यवभासते ॥
चैतन्य की छाया के प्रवेश के कारण व्यावहारिक जीव की उत्पत्ति होती है। और इस जीवत्व का आरोप (अध्यास) होने के कारण, साक्षी चैतन्य में भी जीवभाव का आभास प्रतीत होने लगता है।
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