चैतन्य की छाया के सम्मिलन से जीव व्यावहारिक (सांसारिक व्यवहार करने वाला) रूप में प्रकट होता है; और इस जीवत्व का आरोप (अध्यास) साक्षी (शुद्ध आत्मा) पर भी प्रतीत होने लगता है।
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