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सरस्वती रहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 19
आवृणोत्यपरा शक्तिः सा संसारस्य कारणम् । साक्षिणः पुरतो भातं लिङ्गदेहेन संयुतम् ॥
दूसरी शक्ति, जो आवरण रूप है, वह साक्षी के समक्ष प्रकट उस (चैतन्य) को लिङ्ग शरीर से युक्त रूप में ढँक देती है और यही (अविद्या-जनित आवरण) संसार का कारण बनती है।
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