मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सरस्वती रहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 18
विक्षेपशक्तिर्लिङ्गादिब्रह्माण्डान्तं जगत्सृजेत् । अन्तर्दृग्दृश्ययोर्भेदं बहिश्च ब्रह्मसर्गयोः ॥
विक्षेपशक्ति लिङ्गशरीर आदि से लेकर सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड तक इस जगत की रचना करती है; और भीतर (अन्तः) द्रष्टा और दृश्य के बीच भेद उत्पन्न करती है तथा बाहर (बहिः) भी ब्रह्म से भिन्न सृष्टि का विस्तार प्रकट करती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सरस्वती रहस्य के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सरस्वती रहस्य के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें