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सरस्वती रहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 18
विक्षेपशक्तिर्लिङ्गादिब्रह्माण्डान्तं जगत्सृजेत् । अन्तर्दृग्दृश्ययोर्भेदं बहिश्च ब्रह्मसर्गयोः ॥
विक्षेपशक्ति लिङ्गशरीर से लेकर ब्रह्माण्ड पर्यन्त सम्पूर्ण जगत् की सृष्टि करती है। यह शक्ति अन्तःकरण में द्रष्टा और दृश्य के भेद को तथा बाह्य रूप से ब्रह्म और सृष्टि के भेद को भी प्रकट करती है।
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