मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सरस्वती रहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 17
यः स ईश्वर इत्युक्तः सर्वज्ञत्वादिभिर्गुणैः । शक्तिद्वयं हि मायाया विक्षेपावृतिरूपकम् ॥
जो (तत्त्व) सर्वज्ञता आदि दिव्य गुणों से युक्त होकर ‘ईश्वर’ कहलाता है, उसकी माया की दो शक्तियाँ मानी गई हैं—विक्षेप (प्रक्षेपण) और आवरण (आच्छादन) रूप वाली।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सरस्वती रहस्य के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सरस्वती रहस्य के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें