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सरस्वती रहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 16
सात्विकत्वात्समष्टित्वात्साक्षित्वाज्जगतामपि । जगत्कर्तुमकर्तुं वा चान्यथा कर्तुमीशते ॥
सत्त्वप्रधान होने के कारण, समष्टि स्वरूप होने के कारण, तथा समस्त जगत् के साक्षी होने के कारण, वह ईश्वर जगत् की रचना करने, न करने अथवा अन्य प्रकार से करने में समर्थ है।
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