शुद्ध सत्त्वप्रधान माया में प्रतिबिम्बित अज(अजन्मा चैतन्य) का स्वरूप प्रकट होता है।
यह सत्त्वप्रधान प्रकृति ही माया के नाम से प्रतिपादित की जाती है।
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