आत्मविद्या मया लब्ध्वा ब्रह्मणैव सनातनी । ब्रह्मत्वं मे सदा नित्यं सच्चिदानन्दरूपतः ॥
मैंने सनातन ब्रह्म से आत्मविद्या प्राप्त की है। उस सत्-चित्-आनन्दस्वरूप ब्रह्म के कारण मेरा ब्रह्मस्वरूप सदा और नित्य सिद्ध है।
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