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सरस्वती रहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 10
अश्रुतो बुध्यते ग्रन्थः प्रायः सारस्वतः कविः । इत्येवं निश्चयं विप्राः सा होवाच सरस्वती ॥
ऐसा साधक अश्रुत (पूर्व में न सुने अथवा न पढ़े गए) ग्रन्थों के अर्थ को भी समझने में समर्थ हो जाता है, और प्रायः सरस्वती की कृपा से कवि एवं विद्वान् बन जाता है। हे विप्रों! इस प्रकार का निश्चयपूर्वक उपदेश स्वयं भगवती सरस्वती ने किया है।
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