कालान्तरोपभोगार्थ संचयः परिकीर्तितः ।
शुश्रूषालाभपूजार्थ यशोऽर्थं वा परिग्रहः ॥
कालान्तर(भविष्य) में भोग के लिए संग्रह करके रखना ही सञ्चय कहलाता है।
शुश्रूषा, लाभ, पूजा तथा यश के लिए चेष्टा करना भी परिग्रह है।
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