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संन्यास • अध्याय 2 • श्लोक 92
माबापूपादि गोमांसं क्षीरं मूत्रसमं भवेत्। तस्मात्सर्वप्रयत्नेन घृतादीन्वर्जयेद्यतिः ॥
लहसुन युक्त पदार्थ तथा उड़द, अपूप (मालपुआ) आदि के पदार्थ गोमांस के समान माने गए हैं। दूध मूत्र के समान माना गया है। अतः संन्यासी को सदा घृत आदि से रहित भिक्षा ही प्रयत्नपूर्वक स्वीकार करनी चाहिए।
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