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संन्यास • अध्याय 2 • श्लोक 91
घृतं श्वमूत्रसदृशं मधु स्यात्सुरया समम्। तैलं सूकरमूत्रं स्यात्सूपं लशुनसंमितम् ॥
संन्यासी के लिए घृत कुत्ते के मूत्र के सदृश है, शहद मदिरा पान के समान है, तेल शुकर के मूत्र के समतुल्य है,
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