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संन्यास • अध्याय 2 • श्लोक 90
अभिशस्तं च पतितं पाषण्डं देवपूजकम्। वर्जयित्वा चरेद्वैक्षं सर्ववर्णेषु चापदि ॥
आपत्ति कालीन स्थिति में संन्यासी निन्दनीय परिवार, पतित एवं पाखण्डी पदच्युत का परित्याग करके समस्त वर्ण-जातियों के यहाँ से भिक्षा प्राप्त कर सकता है।
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