संन्यासी द्विज को देखकर सूर्यदेव भी मानो अपने स्थान से विचलित होकर कहते हैं —
"यह संन्यासी मेरे मण्डल को भेदकर उस परब्रह्म को प्राप्त करेगा, जो सबसे परे और परम है।"
पूरा ग्रंथ पढ़ें
संन्यास के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।