मन में किसी भी प्रकार का संकल्प किए बिना, किसी भी तीन, पाँच अथवा सात घरों से मधुमक्खी के समान थोड़ी-थोड़ी भिक्षा ग्रहण करना असंकल्पित माधूकर कहलाता है।
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