मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
संन्यास • अध्याय 2 • श्लोक 80
नैव सव्यापसव्येन भिक्षाकाले विशेद्‌गुहान्। नातिक्रामेद्गृहं मोहाद्यत्र दोषो न विद्यते ॥
भिक्षा के समय सव्य-अपसव्य (दाएँ-बाएँ) मार्ग से घर में प्रवेश नहीं करना चाहिए। जिस घर में किसी प्रकार का दोष न हो, उसे भूल अथवा मोहवश भी नहीं छोड़ना चाहिए (वहाँ भिक्षा ग्रहण कर लेनी चाहिए)
पूरा ग्रंथ पढ़ें
संन्यास के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

संन्यास के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें