नैव सव्यापसव्येन भिक्षाकाले विशेद्गुहान्।
नातिक्रामेद्गृहं मोहाद्यत्र दोषो न विद्यते ॥
भिक्षा के समय सव्य-अपसव्य(दाएँ-बाएँ) मार्ग से घर में प्रवेश नहीं करना चाहिए।
जिस घर में किसी प्रकार का दोष न हो, उसे भूल अथवा मोहवश भी नहीं छोड़ना चाहिए (वहाँ भिक्षा ग्रहण कर लेनी चाहिए)।
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