स्वच्छतोर्जितता सत्ता हृद्यता सत्यता ज्ञता। आनन्दितोपशमता सदा प्रमुदितोदिता। पूर्णतोदारता सत्या कान्तिसत्ता सदैकता ॥
स्वच्छता, बलसम्पन्नता, सत्तास्वरूपता, हृदय की पवित्रता, सत्यता और ज्ञाता-भाव—ये उसके स्वरूप हैं। वह आनन्दमय, उपशान्त, सदा प्रमुदित एवं प्रकाशमान रहता है। वह पूर्ण, उदार, सत्यस्वरूप, कान्तिमय, सत्तामय तथा सदा एकत्वस्वरूप है।
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