मैं उस परम पद को प्राप्त हो चुका हूँ। मैं अकेला (अद्वितीय) हूँ। मैं विजयी हूँ। मैं निर्वाणस्वरूप हूँ, निःस्पृह हूँ, निरंश हूँ तथा निष्काम हूँ।
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