जो (मनुष्य) व्रत, यज्ञ, तप, दान, होम और स्वाध्याय-रहित हैं, सत्य एवं शुचिता से विहीन हैं, उन्हें संन्यास की दीक्षा नहीं देनी चाहिए। इस तरह के लोग चाहें तो 'आतुर संन्यासी' हो सकते हैं; किन्तु ऐसे लोग संन्यास, के नियमानुसार अधिकारी नहीं हो सकते।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
संन्यास के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।