संप्रत्यवसितानां च महापातकिनां तथा।
व्रात्यानामभिशस्तानां संन्यासं नैव कारयेत् ॥
जिन्हें अकस्मात् वैराग्य हो गया हो, महापातकी, व्रात्य (संस्कारहीन) एवं लोक में निंदित व्यक्तियों को संन्यास को दीक्षा नहीं देनी चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
संन्यास के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।