संप्रत्यवसितानां च महापातकिनां तथा।
व्रात्यानामभिशस्तानां संन्यासं नैव कारयेत् ॥
आत्महत्या का संकल्प कर चुके व्यक्तियों, महापातकियों,
व्रात्यों(वैदिक संस्कारों से भ्रष्ट अथवा वंचित व्यक्तियों) तथा अभिशस्त(गंभीर दोष या सामाजिक-धार्मिक दण्ड से ग्रस्त व्यक्तियों) को संन्यास नहीं दिलाना चाहिए।
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