मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
संन्यास • अध्याय 2 • श्लोक 58
भ्रष्टबीजोपमा भूयो जन्माङ्करविवर्जिता। हृदि जीवद्विमुक्तानां शुद्धा भवति वासना ॥
जिस प्रकार भुना हुआ बीज अंकुर उत्पन्न करने में असमर्थ रहता है, उसी प्रकार जो जीवनमुक्त हो जाते हैं, उनके हृदय की वासना और आसक्ति प्रायः पूर्ण पवित्रता से युक्त हो जाती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
संन्यास के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

संन्यास के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें