जिसको पूर्ण रूप से ज्ञान प्राप्त हो गया है, जिसने अच्छाई एवं बुराई के ध्यान का परित्याग कर दिया है तथा जिस (संन्यासी) ने चित्त को चित्त में हो संयुक्त कर दिया है, उसका ही जीवन अत्यन्त सुन्दर है।
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