जिसमें अकर्तापन का भाव विद्यमान है, जिसकी बुद्धि में आसक्ति नहीं है तथा जो समस्त भूत-प्राणियों को समभाव से देखता है, निश्चय ही उसी का जीवन शोभनीय है।
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