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संन्यास • अध्याय 2 • श्लोक 5
आरूढपतितापत्यं कुनखी श्यावदन्तकः । क्षयीतथाङ्गविकलो नैव संन्यस्तुमर्हति ॥
आरूढ़-पतित (पूर्व में संन्यास ग्रहण कर उससे पतित हुआ व्यक्ति), पतित व्यक्ति की संतान, कुरूप नखों वाला, श्याव-दन्त (अस्वाभाविक अथवा विकृत दाँतों वाला), क्षयरोग से पीड़ित तथा अंग-विकल व्यक्ति — ये संन्यास ग्रहण करने के अधिकारी नहीं माने गए हैं।
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